ULTIMATE CAUSE
देश में कोरोना की दूसरी लहर से सभी ग्रस्त है। किसी को नहीं पता की इससे भी बड़ी कोई समस्या है। इस वायरस ने मुलभुत मानव प्रक्रिया पर ही हमला कर दिया है। लोगो के रहन - सहन से लेकर रोजगार तक की प्रक्रिया पर असर पड़ा है। एक ऐसी बीमारी जिस पर काबू पाने के लिए उससे सिर्फ बचाव का तरीका ढूंढा जा रहा है। इस माध्यम से लोग और भी संक्रमण से डरने लगे है। पुरे १ वर्ष से जयादा समय से पूरी दुनिया इससे जूझ रही है। वैक्सीन इससे निपटने में सहायता तो कर रही है मगर वायरस संक्रमण को रोकने का रास्ता अभी तक पूरी तरह नहीं बना है। क्योंकि यह वायरस संक्रमण पर जयादा निर्भर है। social distancing , lockdown आदि मनुस्य को ही पिंजरे रूपी दुनिया में कैद करके रखी हुई है। यह उपाय काम और मनुस्य के लिए कोरोना के सामने हाथ खड़ा करने जैसी जयादा लगती है। मगर हमारा देश इतनी बड़ी समस्या को झेलने के लिए मज़बूर है। इसकी मुख्य समस्या है हमारी निति।
हम भारत के भविस्य को श्रोतो के दोहन पर सिर्फ खड़ा करना चाहते है। इतनी बड़ी जनसख्या के लिए कोई भी कदम छोटा है। हमने अपनी मूल समस्या के बारे में कभी नहीं सोचा। ऐसा इसलिए हम अपनी समस्या का उपाय नहीं ढूँढ रहे , बल्कि अपने विकास के दिशा को नए पैमाने पर रखने की कोशिश कर रहे है। हमारी मुलभुत समस्याए :-
जनसख्या , स्वास्थय, शिक्षा और निति पर निर्भर करती है। भ्रस्टाचार भी इन सब चीजों पर ध्यान नहीं देने का परिणाम है।
कल्पना कीजिए की अगर हमारी जनसख्या अगर अभी से आधी भी होती , तो क्या हम ऐसी समस्याओ से घिरे होते? बिलकुल नहीं।
हमारी तो जनसख्या दर विश्व में सबसे जयादा है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए हमारे पास रणनीति नहीं है। हमारी सरकार जयादातर नीतिया अपनी प्रचार के लिए बनाती है।
कोरोना की समस्या कम हो सकती थी अगर हम हमारी सरकार पहले से थोड़े से सजग रहते। पहले से का अर्थ किसी भी सरकार के vision पर निर्भर हो सकता है। हम अभी तक स्वास्थय की समस्या को कम करने के लिए निति का निर्धारण नहीं कर पाए और गरीब देश में बुलेट ट्रैन की परियोजना लाकर लोगो की आखों में सिर्फ धूल झोक रहे है। प्रदुषण में भारत शीर्ष पर है और दवाइओ के लिए नयी कम्पनिया खरी करना व्यापार तो है मगर स्वास्थय का उपाय नहीं।
हमारी
मुलभुत समस्याए बदली है, मगर वो हर दिन
और बढ़ रही है।
जिम्मेदार कौन है ? यह विचार करने
की बात है।
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