कहा गई जदयू की नारी भक्ति
तारीख - १०.१०.२० , समय- शनिवार की रात, जगह - दानापुर पोलिश थाना का इलाका।
दो टेम्पो चालकों ने एक नाबालिग लड़की को बेहला फुसलाकर बलात्कार किया। ये खबर पटना की अखबारों में पहले पेज पे है। लगातार दूसरे दिन , तारीख-११.१०.२० को पटना - बक्सर का इलाका , ७ लोगो ने एक महिला का गैंगरेप किया। बिहार सरकार, समाजसेवी संस्थाए , यहाँ तक की राज्य की जनता भी मौन है। ऐसा इसलिए क्योकि यह बिहार है। यह क्राइम होना सामान्य बात है। तब जब दिल्ली का क्राइम रेट ज्यादा है तब यह की जनता सामूहिक न्याय के लिए क्यों आगे आती है?
अगर यह सरकार , महिलाओ की सुरक्षा नहीं कर सकती , तब उसके अस्तित्व का कोई महत्व नहीं है। इसके अलावा यहां नारी शक्ति भी सोई हुई है। जो सिर्फ जगाने पर ही दिखती है। क्या नारी की सुरक्षा केवल नारी की ही जिम्मेदारी है? राजनीती से लिप्त सरकार के आँखों पर पट्टी बंधी हुई है। महापुरषो वाला राज्य आज आज खुद दिन-हिन् है।
बिहार की सरकार १५ वर्षो से केंद्र से केवल पैकेज लेने का ही काम किआ है। राज्य के विकाश का सारा भार यहां की जनता जैसे - तैसे उठा रखी है। अभी भी सरकार का एजेंडा पैकेज लेना ही है न की खुद से यहां के लिए अन्य राज्यों की तरह विकाश करना है। यहां सिर्फ विकाश पुरुष की ही कहानी लिखी गई है। और जिन महापुरषो ने बिहार के विकाश के लिए कार्य किआ उसकी जयंती तक सरकार भूल गई।
इस तरह की राजनीती का साथ देने वाले भी दोषी है।
१५ वर्षो के बाद भी बिहार विकाश में सबसे निचले पायदान पे है। यहां की सरको पे गाडी चलने लायक नहीं और मेट्रो का सपना दिखाया जाता है। जीडीपी रेट दिखाकर लगातार अपनी नाकामी को यहां की सरकार छुपा रही है। १५ वर्षो के बाद भी यहां से पलायन रुका नहीं। इतना समय बिहार के विकाश के लिए पर्याप्त था। जबतक जनता राजनीती का काला नकाब नहीं हटाएगी , तब तक क्राइम और पलायन नहीं रुकेगा। यह कैसा प्रशासन है जो पूरी तरह से भ्रस्टाचार में लिप्त है। और ये बाते सभी जानते है।
इलेक्शन सर पे है जनता राजनीती से ऊपर उठकर सिर्फ कैंडिडेट के क्रेडिट के आधार पे वोट दे।
केवल महिलाओ को रिजर्वेशन देकर उनका वोट लेने से कुछ नहीं होगा।
उनके विकाश के लिए सुरक्षा से लेकर सामान अवसर देना ही उनके हित में है। राजनीती की अखाड़ा में जनता पीस जाती है और नेता जीत जाते है।